मधुमेह का रोग (DIABETES) MADHUMEH KA ROG -Dr. Amit Jain
मधुमेह
एक ऐसा रोग है जिसके रोगी को बहुत समय तक तो इस रोग के होने का पता ही नहीं चलता है। आधुनिक समय में यह अंग्रेजी के शब्द ´डाइबिटीज´ के नाम से जाना जाता है। इस तरह के रोग में रोगी के पेशाब के साथ शहद जैसा पदार्थ निकलता है, यह रोग धीरे-धीरे होता है।
मधुमेह के लक्ष्ण क्या है
इसके प्रभाव से शरीर की शक्ति घटती जाती है। इस रोग के शुरुआत में स्वभाव में चिड़चिड़ापन, आलस्य, प्यास अधिक लगना, अधिक पानी पीना, काम में मन न लगना, जी घबराना औ कब्ज की शिकायत आदि लक्षण प्रकट होते हैं। औरतों की अपेक्षा पुरुषों में यह रोग अधिक होता है। मोटे आदमी अक्सर इस रोग से पीड़ित देखे जाते हैं। पहले यह रोग 40-50 वर्ष की अवस्था में होता था, लेकिन आजकल छोटे बच्चों को भी रोग हो जाता है।
एक ऐसा रोग है जिसके रोगी को बहुत समय तक तो इस रोग के होने का पता ही नहीं चलता है। आधुनिक समय में यह अंग्रेजी के शब्द ´डाइबिटीज´ के नाम से जाना जाता है। इस तरह के रोग में रोगी के पेशाब के साथ शहद जैसा पदार्थ निकलता है, यह रोग धीरे-धीरे होता है।
मधुमेह के लक्ष्ण क्या है
इसके प्रभाव से शरीर की शक्ति घटती जाती है। इस रोग के शुरुआत में स्वभाव में चिड़चिड़ापन, आलस्य, प्यास अधिक लगना, अधिक पानी पीना, काम में मन न लगना, जी घबराना औ कब्ज की शिकायत आदि लक्षण प्रकट होते हैं। औरतों की अपेक्षा पुरुषों में यह रोग अधिक होता है। मोटे आदमी अक्सर इस रोग से पीड़ित देखे जाते हैं। पहले यह रोग 40-50 वर्ष की अवस्था में होता था, लेकिन आजकल छोटे बच्चों को भी रोग हो जाता है।
मधुमेह रोग में पैतृक (वंशानुगत) प्रभाव का भी बहुत बड़ा योगदान है। शरीर में इंसुलिन नाम का तत्व पाचन क्रिया से सम्बन्धित पेनक्रियाज गंथि से उत्पन्न होता है। इससे शक्कर रक्त (खून) में प्रवेश करता है, और वहां ऊर्जा में बदल जाता है। उक्त पेनक्रियाज गंथि जितनी शरीर को शूगर (चीनी) की आवश्यकता होती है, उतनी रख लेती है शेष शूगर को जला देती है। मगर यह पेनक्रियाज ग्रंथि इंसुलिन पैदा करना बन्द कर दे या कम कर दे या किसी कारण से यह रस बाधक हो तो डायबिटीज (मधुमेह) रोग पैदा हो जाता है। ऐसी अवस्था में शक्कर खून में चला जाता है और ऊर्जा में बदल नहीं पाता है तथा मूत्र के साथ ही बाहर निकल जाता है जिसे हम मधुमेह रोग के नाम से जानते हैं।
मधुमेह के कारण क्या है :
यह रोग उन लोगों को अधिक होता है जो हमेशा बैठे रहते हैं और कोई शारीरिक काम नहीं करते हैं। इससे शरीर में इन्सुलिन हार्मोन की कमी हो जाती है। इस दशा में जब लोग खाने के साथ शक्कर खाते हैं, वह सही से पच नहीं पाता, इसके कारण पेशाब के साथ चीनी भी बाहर निकल जाती है।
इसके साथ दही, मांस खाने, बरसात का गन्दा पानी पीने, गुड़, शक्कर का अधिक सेवन करने, कफ बढ़ाने वाले पदार्थों का अधिक मात्रा में सेवन करने आदि के कारण यह रोग हो जाता है। यह रोग दो प्रकार का होता है।
मधुमेंह में क्या सावधानी रखे :
मधुमेह से सम्बंधित रोगों में आलू, गाजर, चुकन्दर,, मटर, फलियां, शकरकन्द, क्लस्टर बीन। आदि फलों और सब्जियों का कम से कम प्रयोग करना चाहिए
मधुमेह के कारण क्या है :
यह रोग उन लोगों को अधिक होता है जो हमेशा बैठे रहते हैं और कोई शारीरिक काम नहीं करते हैं। इससे शरीर में इन्सुलिन हार्मोन की कमी हो जाती है। इस दशा में जब लोग खाने के साथ शक्कर खाते हैं, वह सही से पच नहीं पाता, इसके कारण पेशाब के साथ चीनी भी बाहर निकल जाती है।
इसके साथ दही, मांस खाने, बरसात का गन्दा पानी पीने, गुड़, शक्कर का अधिक सेवन करने, कफ बढ़ाने वाले पदार्थों का अधिक मात्रा में सेवन करने आदि के कारण यह रोग हो जाता है। यह रोग दो प्रकार का होता है।
लक्षण :
इस प्रकार के रोगी को बार-बार पेशाब लगता है। उसके शरीर का भार रोजाना कम होने लगता है। रोगी कमजोर हो जाता है। उसे हर समय थकावट मालूम होती है। इसमें आंखों की रोशनी भी कम हो जाती है। रोगी को अधिक प्यास लगती है, शरीर की त्वचा रूखी सी हो जाती है। इन्द्रिय में खुजली अधिक होती है। जब शक्कर का थोड़ा अंश खून में पहुंच जाता है तो शरीर में खुजली-सी होती है। मधुमेह के रोगी को ´अधिक प्यास, फोडे़-फुन्सी होना, घाव न भरना, पैरों में दर्द, आंखों की रोशनी में कमी, कब्ज रहना, टी.बी., शर्करा अधिक बढ़ने पर दुर्बलता, घबराहट, रक्तसंचार की वृद्धि और बेहोशी होती है। सिर दर्द, कब्ज, चेहरा पीला पड़ जाना, दिल में घबराहट, उच्चरक्त चाप होना, घाव देर से ठीक होना, मूत्र में मिठास से चींटी लगना, मुंह का स्वाद मीठा होना, बार-बार मूत्र आना, कमर में दर्द और मर्दाना शक्ति का कमजोर होना आदि लक्षण प्रकट होते हैं।
इस प्रकार के रोगी को बार-बार पेशाब लगता है। उसके शरीर का भार रोजाना कम होने लगता है। रोगी कमजोर हो जाता है। उसे हर समय थकावट मालूम होती है। इसमें आंखों की रोशनी भी कम हो जाती है। रोगी को अधिक प्यास लगती है, शरीर की त्वचा रूखी सी हो जाती है। इन्द्रिय में खुजली अधिक होती है। जब शक्कर का थोड़ा अंश खून में पहुंच जाता है तो शरीर में खुजली-सी होती है। मधुमेह के रोगी को ´अधिक प्यास, फोडे़-फुन्सी होना, घाव न भरना, पैरों में दर्द, आंखों की रोशनी में कमी, कब्ज रहना, टी.बी., शर्करा अधिक बढ़ने पर दुर्बलता, घबराहट, रक्तसंचार की वृद्धि और बेहोशी होती है। सिर दर्द, कब्ज, चेहरा पीला पड़ जाना, दिल में घबराहट, उच्चरक्त चाप होना, घाव देर से ठीक होना, मूत्र में मिठास से चींटी लगना, मुंह का स्वाद मीठा होना, बार-बार मूत्र आना, कमर में दर्द और मर्दाना शक्ति का कमजोर होना आदि लक्षण प्रकट होते हैं।
भोजन तथा परहेज :
पथ्य(क्या खाना चाहिए ) :
मधुमेह के रोगी को करेले का रस और सब्जी खानी चाहिए। शहद मिलाकर आंवले का रस पियें। नाशपाती, सेब, नींबू, अमरूद और टमाटर तथा बिना शक्कर का दूध पियें। जामुन के फल और गुठली का चूर्ण लेना चाहिए। खट्टे फलों के रस, नींबू के रस, सूप तथा सलाद का सेवन ज्यादा मात्रा में करना चाहिये। रोजाना 8-10 गिलास पानी पीना चाहिए। अपथ्य : मधुमेह रोगी को चीनी, गुड़, मीठे पदार्थ, चावल, केला, बीज रहित अंगूर, चीकू, लीची, पका हुआ कटहल, शरीफा, आम, सूखे मेवे, किशमिश, मिठाइयां, ग्लूकोज, जैम, जैली, आइसक्रीम, शहद, कॉफी, चाय, बोर्नविटा, हॉर्लिक्स, कोला, मैदा से बनी चीजें, जैसे सफेद डबलरोटी, बिस्कुट केक, सूजी, ब्रेड, आदि चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए।
अपथ्य(क्या नहीं खाना चाहिए ) इसमें मांसाहारी भोजन का बिलकुल प्रयोग नहीं करना चाहिए। मीठा खाने में न खायें, चिन्ता न करें और थोड़ा सैर करें।
मधुमेह के रोगी को करेले का रस और सब्जी खानी चाहिए। शहद मिलाकर आंवले का रस पियें। नाशपाती, सेब, नींबू, अमरूद और टमाटर तथा बिना शक्कर का दूध पियें। जामुन के फल और गुठली का चूर्ण लेना चाहिए। खट्टे फलों के रस, नींबू के रस, सूप तथा सलाद का सेवन ज्यादा मात्रा में करना चाहिये। रोजाना 8-10 गिलास पानी पीना चाहिए। अपथ्य : मधुमेह रोगी को चीनी, गुड़, मीठे पदार्थ, चावल, केला, बीज रहित अंगूर, चीकू, लीची, पका हुआ कटहल, शरीफा, आम, सूखे मेवे, किशमिश, मिठाइयां, ग्लूकोज, जैम, जैली, आइसक्रीम, शहद, कॉफी, चाय, बोर्नविटा, हॉर्लिक्स, कोला, मैदा से बनी चीजें, जैसे सफेद डबलरोटी, बिस्कुट केक, सूजी, ब्रेड, आदि चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए।
अपथ्य(क्या नहीं खाना चाहिए ) इसमें मांसाहारी भोजन का बिलकुल प्रयोग नहीं करना चाहिए। मीठा खाने में न खायें, चिन्ता न करें और थोड़ा सैर करें।
मधुमेंह में क्या सावधानी रखे :
मधुमेह से सम्बंधित रोगों में आलू, गाजर, चुकन्दर,, मटर, फलियां, शकरकन्द, क्लस्टर बीन। आदि फलों और सब्जियों का कम से कम प्रयोग करना चाहिए
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